प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से NPA में वृद्धि: भारतीय रिज़र्व बैंक
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से NPA में वृद्धि: भारतीय रिज़र्व बैंक
भारतीय रिज़र्व बैंक ने सरकार की फ्लैगशिप योजना प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के कारण नॉन-परफोर्मिंग एसेट्स में हो रही वृद्धि पर चिंता व्यक्त की है। आरबीआई का मत है कि मुद्रा योजना के तहत मंज़ूर किये जाने ऋणों की मॉनिटरिंग की जानी चाहिए।
मुख्य बिंदु
- आरबीआई के अनुसार 2017-18 में मुद्रा योजना के ऋण 2.52% थे, 2018-19 में यह आंकड़ा 2.89% हो गया है।
- 2017 में शिशु श्रेणी में 83,892 ऋण प्रदान किये गये थे, 2019 में इस श्रेणी में 1,39,652 ऋण प्रदान किये गये हैं। 2017 में किशोर श्रेणी के अंतर्गत 51,063 ऋण प्रदान किये गये थे, 2019 में यह आंकड़ा 99868 पर पहुँच गया है।
- आरबीआई के अनुसार 182 मिलियन मुद्रा ऋण खातों में से 3.63 मिलियन खाते डिफाल्टर हो चुके हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को 2015 में लांच किया गया था इसका उद्देश्य नॉन-कॉर्पोरेट, नॉन-फार्म सूक्ष्म/लघु उद्योगों को 10 लाख रुपये का ऋण प्रदान करना है। यह ऋण वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, लघु वित्त बैंक, कोआपरेटिव बैंक, MFI तथा NBFC द्वारा प्रदान किया जाते हैं। इस योजना के तहत तीन प्रकार के ऋण प्रदान किये जाते हैं
- शिशु : 50,000 रुपये तक
- किशोर : 50,000 से 5 लाख रुपये के बीच
- तरुण : 5 लाख से 10 लाख रुपये के बीच


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