छोटी बचत योजनाएं : पश्चिम बंगाल का योगदान सबसे अधिक

वित्त मंत्रालय के तहत संचालित राष्ट्रीय बचत संस्थान (National Savings Institute) ने हाल ही में घोषणा की कि देश में छोटी बचत योजना में पश्चिम बंगाल का सबसे अधिक योगदान है। राज्य कुल कॉर्पस में 15% योगदान देता है। इसने अब तक छोटी बचत योजना के तहत 90,000 करोड़ रुपये एकत्र किए हैं।
छोटी बचत योजना के टॉप परफ़ॉर्मर
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पश्चिम बंगाल के बाद उत्तर प्रदेश का स्थान था।उत्तर प्रदेश राज्य ने 69,660 करोड़ रुपये एकत्र किए हैं।
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महाराष्ट्र को तीसरा स्थान दिया गया।महाराष्ट्र राज्य ने 57% का योगदान दिया, जो 63,026 करोड़ रुपये है।
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गुजरात को चौथा स्थान मिला।गुजरात ने 16% का योगदान दिया, जो कि 48,645 करोड़ रुपये है।
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तमिलनाडु का 8% योगदान रहा, जो 28,598 रुपये है।
छोटी बचत योजनाएं क्या हैं?
छोटी बचत योजनाओं में बारह यंत्र होते हैं। प्रमुख छोटी बचत योजनाएं इस प्रकार हैं:
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राष्ट्रीय बचत पत्र
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सामान्य भविष्य निधि
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किसान विकास पत्र
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सुकन्या समृद्धि योजना
राष्ट्रीय बचत पत्र (National Savings Certificate)
यह एक निश्चित आय निवेश है जिसे किसी भी डाकघर में खोला जा सकता है। यह छोटे से मध्यम आय निवेशकों को आयकर में बचत करते समय निवेश करने में मदद करता है। राष्ट्रीय बचत पत्र की खरीद पर कोई अधिकतम सीमा नहीं है। हालांकि, आयकर अधिनियम की धारा 80 के अनुसार, केवल 1.5 लाख रुपये तक के निवेश से ही कर में छूट मिल सकती है।
सार्वजनिक भविष्य निधि (Public Provident Funds)
सार्वजनिक भविष्य निधि 1968 में भारत में पेश की गई थी। सार्वजनिक भविष्य निधि का मुख्य उद्देश्य निवेश के रूप में छोटी बचत को जुटाना है। मूल रूप से, सार्वजनिक भविष्य निधि एक दीर्घकालिक निवेश है। इस योजना के तहत अर्जित ब्याज कर योग्य नहीं हैं।
किसान विकास पत्र (Kisan Vikas Patra)
इसे 1988 में लॉन्च किया गया था। किसान विकास पत्र एक छोटी बचत प्रमाणपत्र योजना है। यह दीर्घकालिक निवेश है।
सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi
Scheme)
यह योजना बालिकाओं के माता-पिता के लिए शुरू की गई थी। यह एक बालिका के माता-पिता को उनकी भावी शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
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Reviewed by kamini
on
April 05, 2021
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